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भारतीय युवा मंच का गठन

Posted On: 14 Mar, 2012  
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“चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात”

Posted On: 29 Jan, 2012  
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तो अब राम बसेगें रमजान में……

Posted On: 4 Oct, 2011  
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किसानो के “हित में नीति” या किसानो पर “राजनीति”?

Posted On: 10 Jul, 2011  
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“बाबा में है दम, वन्दे मातरम”

Posted On: 8 Jun, 2011  
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“ये कैसा विकास “

Posted On: 3 Jun, 2011  
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“अन्ना की अन्नागिरी के बाद बाबा की बाबागिरी”

Posted On: 29 May, 2011  
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“क्या भूमि अधिग्रहण से देश का विकास होगा?”

Posted On: 23 May, 2011  
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“समस्याएँ सेर तो समाधान सवा सेर”

Posted On: 21 May, 2011  
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“क्या ऐसे हो पायेगा विकास ?”

Posted On: 17 May, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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प्रिय शरद शुक्ल जी बहुत सुन्दर कहा आप ने ये बात भी जग जाहिर है -नीति नियम बनाने वाले भी शायद इतने मूर्ख नहीं हैं पर इससे उनको फर्क क्या पड़ता है वो तो १० रुपये में या फ्री में ही पांच सितारा का भोज खाते रहते हैं काश सब के बैंक बैलेंस की प्रतियाँ हर महीने जमा करनी पड़ें और उन्हें भी एक रोज किसी गरीब की झोपडी में वही खाना खिलाया जाये तो आँख खुले इनकी - ताश के पत्तों के घर में यदि एक भी पत्ता कमजोर या गलत हुआ तो वो सेकंड भर भी नहीं खड़ा रह सकता उसी प्रकार यदि देश का विकास करना है तो इन गरीबों और किसानो का भी विकास एक तरफ ऊंचे महल और दूसरी तरफ दो जून भोजन को तरसते लोग -- सार्थक लेख बधाई हो सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

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पाकिस्तान की आवाम आज जागने का मौका है ,आप का भविष्य ,आप के बच्चो का भविष्य आप के हाथ में है ,फैसला आप को करना है ,आप इंसानियत का साथ देंगे या आतंकवाद का ,जिंदगी प्यार में है न की खून- खराबे में ,हमें सियाशी लोग धर्म के नाम पर आपस में लड़ाते रहेंगे ,इससे न आप को कुछ मिलेगा और न हमें ,मिलेगा तो सिर्फ दुःख और गरीबी इसके सिवाय और कुछ नहीं मिलेगा अपने लिए नहीं तो अपने आने वाली पीढ़ी के लिए ,नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ़ नहीं करेगी ये लोग जो हिंदुस्तान और पाकिस्तान को धर्म ,जाती के नाम पर एक दुसरे का खून बहाते है इन्हें "अल्लाह" या "भगवान" कभी माफ़ नहीं करेगा मेरा आप लोगो से निवेदन है जागिये नहीं तो हमें आगे जागने का मौका नहीं मिलेंगा ,इस आतंकवाद को जड़ से मिटाए "इस्लाम" हमें यही सिखाता है की एक दुसरे की सहायता करे न की "इस्लाम" के नाम पर एक दुसरे का खून बहाए धन्यवाद .........................................................................Please send any one person

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शरद शुक्ल जी बहुत ही सुन्दर विषय और लेख आप का -ये ज्वलंत मुद्दा बहुत बार गरमाता है और ठंडा हो जाता है भूमि अधिग्रहण बिल जैसा सुना गया है तैयार तो है पर जब तक काम चल जाता है सब खटाई में रहता है ये हमारे यहाँ की नीति बन चुकी है जब पुल से कोई गिर के मर जाये तो पुल बनाओ गटर में कोई गिर जाये तो उसका मुह बंद करो कोई बिल्डिंग टेढ़ी हो उसे पहले खाली मत कराओ जब गिरे मरें तमाशा मीडिया अनशन हो तो कुछ होता है कभी कभी टाटा नैनो सा पूरा कारखाना भले ही न बंद हो जाये पर किसानों की समस्या का उचित समाधान नहीं निकला अब तो सरकार को चेत जाना चाहिए और किसानों के हित को सोच के हिंसा बचानी चाहिए सुन्दर लेख के लिए बधाई शुक्ल भ्रमर ५

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